In this story, Earth gives us a lot. We do not some give in return.

in hive-159906 •  6 months ago 

रतनलाल गाँव के मुखिया थे । बात के धनी वचन के पक्के। अपनी नेकी और ईमानदारी के लिए सबके प्रिये है। उम्र यही कोई साठ रोबदार था । चाल इतनी तेज़ कि अच्छे - अच्छे नौजवान पीछे रह जाएँ । उन्हें एक चीज़ बहुत प्रिय थी - काँच की एक पारदर्शी पेटी जिसके आर - पार सब नजर आता था । देखने में तो वह पेटी खाली लगती लेकिन खोलने पर उसमें से मनचाही वस्तु निकाली जा सकती थी । रतनलाल को किसी वस्तु की ज़रूरत न थी। वे पेटी को बहुत सँभालकर रखते थे। हाँ , मुखिया होने के नाते गाँववालों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए उसमें से कभी कभी कुछ निकाल लेते थे

एक दिन रतनलाल को किसी काम से बाहर जाना पड़ा। वे अपने मुनीम को पेटी सौंपते हुए बोले, पूरा आश्वासन दिया। यह पेटी मुझे अपनी जान से भी प्यारी है, इसे बहुत सँभालकर रखिएगा। ''मुनीम ने उन्हें तीन युवक इसी पेटी को कई दिनों से उड़ाने का अवसर ढूँढ़ रहे थे। बस, उन्हें मौका मिल गया। उन्होंने बहुत चतुराई से वह पेटी चुरा ली। घर जाकर उन्होंने पेटी को खोला और अपनी इच्छा से मनचाही चीजें निकालते रहे। एक दिन बीता। दो दिन बीते, तीन दिन बीते। पेटी में से सामान निकालते-निकालते जब वे थक गए तो एक युवक ने अपने मित्रों से कहा, "बस भाई! बहुत हो गया। मैं तो थककर चूर हो गया हूँ। "दूसरा बोला, “हाँ भई! मैं भी थक गया हूँ। " तीसरा बोला, “मेरे तो पूरे शरीर में दर्द हो रहा है । मैं तो अब खा-पीकर आराम करूँगा। "तीनों ने फैसला किया कि वे जी भरकर खाना खाएँगे। फिर चादर तानकर सो जाएंगे। इधर मुनीम जी की नींद उड़ चुकी थी। मुखिया जी कितने भरोसे से। पारदर्शी पेटी सौंपकर गए थे। जब वे वापस आएँगे तो उन्हें क्या जवाब दूंगा? इसी चिंता में वे चहलकदमी कर रहे थ। उनकी भूख-प्यास, नींद सब समाप्त हो गई थी। उधर तीनों युवक घोड़े बेचकर सो गए।

थोड़ी देर बाद उनमें से तीसरा युवकधीररोजता और पेटी खोलकर सोना चांदी निकालने लगा। उसना कहां अच्छा है कि ये दोनों सोते रहे। में उनसे ज्यादा धनवान या जाऊँगा। 'वह सामान निकाल निकालते थककर गिर पड़ा। कुछ समय बाद दूसरा युवक उठा। वह भी ज्यादा धन प्राप्त कर के लिए पेटी से सोना चाँदी निकालो लगा। वह थककर ज़मीन पर गिर पड़ा। पहले गुचक ने भी यही किया। तीनों युवक पककर बेहाश हो चुके थे परंतु लालच नहीं गया। अगले दिन जब वे सोकर उठे तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहाँ कुछ न था... न सोना- चाँदी। उन्होंने पूरा घर छान मारा। लेकिन कुछ हाथ न आया। ये एक दूसरे से पूछने लगे, "कहीं तुमने तो सामान नहीं चुराया है? साफ-साफ बता दो । वरना बहुत बुरा होगा। "लेकिन तीनों इस बात से इनकार करते रहे। थोड़ी देर बाद वे झगड़ने लगे। उनमें मार पीट होने लगी। लड़ाई-झगड़े की आवाज सुनकर पूरा गाँव इकट्ठा हो गया। इतने में रतनलाल वहाँ पहुँच गए। वे घर लौट आए थे। वे सारा मामला तुरंत समझ गए। उन्होंने युवकों से पूछा, "क्या ने उस पेटी में वापस कुछ रखा था? "" नहीं तो, भला वापस क्यों रखते? "तीनों एक साथ बोले। "बस यही गलती हो गई। मैं जब भी पारदर्शी पेटी में से कुछ निकालता था तो उसमें कुछ - न कुछ डालता भी जाता था। "तीनों युवक एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। मुखिया जी आगे बोले, जब आदमी सिर्फ लेना ही लेना सीखता है, बदले में कुछ देना नहीं जानता तो वह बहुत स्वार्थी हो जाता है। हमने पेटी मे लिया बहुत कुछ लेकिन दिया कुछ नहीं। इसलिए सब कुछ समाप्त हो गया। सभी गाँववासी बड़े ध्यान से उनकी बातें सुन रहे थे। उन्होंने बड़ी गहराई से अपने मुखिया की बात समझ ली थी। "इस पृथ्वी से भी हमने बहुत कुछ लिया- शुद्ध हवा, पानी, अनाज, पेड़-पौधे। लेकिन बदले में कुछ नहीं दिया। जो लिया उसको धीरे-धीरे नष्ट कर रहे हैं । अगर हमने इस पृथ्वी को इसे संभाल कर न रखा तो कहीं ऐसा न हो कि हमारा हाल भी इन युवकों की तरह हो। " मुखिया रतनलाल ने समझाते हुए कहा। यही जीवन का असली परिणाम होते है।

I think you will like this post.
Enjoy your Saturday. A good story makes us learn something new in life. Welcome to this story.
Have a good day.

Thanks for your up-vote, comment and resteemed

Authors get paid when people like you upvote their post.
If you enjoyed what you read here, create your account today and start earning FREE STEEM!